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भस्मधारणम्

आचम्य प्राणानायम्य देशकालो सङ्कीर्त्य
शरीरशुद्ध्यर्थं भस्मधारणमहं करिष्ये।।

ॐ मा न॑स्तो॒के तन॑ये॒ मा न॑ आ॒यौ मा नो॒
गोषु॒ मा नो॒ अष्वे᳚षु रीरिषः।
वी॒रान्मा नो᳚ रुद्र भामि॒तो
व॑धीर्ह॒विष्म᳚न्त॒: सद॒मित्त्वा᳚ हवामहे।।
इति हस्ते भस्मगृहीत्वा जलमिश्रितं कृत्वा।।

ॐ ईशानः सर्व॑विद्या॒ना॒मीश्वरः सर्व॑भूता॒नां॒
ब्रह्माधि॑पति॒र्ब्रह्म॒णोऽधि॑पति॒र्ब्रह्मा॑
शि॒वो मे॑ अस्तु सदाशि॒वोम्।।
शिरसि।।

ॐ तत्पुरु॑षाय वि॒द्महे॑ महादे॒वाय॑ धीमहि।
तन्नो॑ रुद्रः प्रचो॒दया᳚त्।।
मुखे।।

ॐ अ॒घोरे᳚भ्योऽथ॒ घोरे᳚भ्यो॒ घोर॒घोर॑तरेभ्यः।
स॒र्वतः॑ शर्व॒ सर्वे᳚भ्यो॒ नम॑स्ते अस्तु रु॒द्ररू॑पेभ्यः।।
हृदये।।

ॐ वा॒म॒दे॒वाय॒ नमो॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ नमः॑ श्रे॒ष्ठाय॒ नमो॑ रु॒द्राय॒
नमः॒ काला॑य नमः॒ कल॑विकरणाय॒ नमो॒
बल॑विकरणाय॒ नमो॒ बला॑य॒ नमो॒ बल॑प्रमथनाय॒ नमः॒
सर्व॑भूतदमनाय॒ नमो॑ म॒नोन्म॑नाय॒ नमः॒।।
गुह्ये।।

स॒द्योजा॒तं प्र॑पद्या॒मि॒ स॒द्योजा॒ताय॒ वै नमो॒ नमः॑।
भ॒वे भ॑वे॒ नाति॑भवे भवस्व॒ माम्।
भ॒वोद्भ॑वाय॒ नमः।।
पादाभ्यां नमः।।

अग्निरिति मन्त्रस्य पिप्पलादोरुद्रोगायत्री जपे विनियोगः।।
ॐ अग्निरिति भस्म।
वायुरिति भस्म।।
जलमिति भस्म।।
स्थलमिति भस्म।।
व्योमेति भस्म।।
सर्व ꣳ हवाइदं भस्म।।
मनएतानि चक्षूंषि भस्मानि।।
इत्यभिमन्त्र्यजलमिश्रितेन मध्यमाङ्गलित्रयगृहीतेन
ललाटहृदयनाभिगलांसबाहुसन्धिपृष्ठशिरः
स्थानेषु ॐ नमः शिवायेति शिवमन्त्रेण त्रिपुण्ड्रान्कुर्यात्।।

 

महामंत्र

श्री भक्तकार्यकल्पद्रुम गुरुसार्वभौम श्रीमद्राजाधिराज योगिमहाराज त्रिभुवनानंद अद्वैत अभेद निरंजन निर्गुण निरालंब परिपूर्ण सदोदित सकलमतसस्थापित श्री सद्गुरु माणिकप्रभु महाराज की जय!

 

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