श्री दत्तजयंती महोत्सव निमंत्रण पत्रिका – २०१९

श्री ज्ञानराज माणिकप्रभु

विकारीनाम संवत्सर १९४१, श्रीमाणिक शके २०२

श्रीभक्तकार्यकल्पद्रुम गुरुसार्वभौम श्रीमद्राजाधिराज योगिमहाराज त्रिभुवनानंद अद्वैत अभेद निरंजन निर्गुण निरालंब परिपूर्ण
सदोदित 
सकलमतस्थापित श्रीसद्गुरु माणिकप्रभु महाराज की जय!

संसार की प्रत्येक वस्तु कर्म से अथवा क्रिया से साध्य होती है, परंतु प्रभु परमात्मा किसी भी क्रिया अथवा कर्म से प्राप्त नहीं होता। वह कर्मसाध्य अथवा क्रियासाध्य नहीं है। प्रत्येक कर्म का आदि और अंत होता है, प्रभु अनादि और अनंत होने के कारण कर्म से उसकी प्राप्ति नितांत असंभव है। ‘न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्त्वमानशु:’ इस श्रुति का आशय भी यही है। “किसी भी साधन से, उपाय से, प्रयास से मैं प्रभु परमात्मा को प्राप्त कर लूँगा” ऐसा कहना मूर्खता का लक्षण है। प्रभु की प्राप्ति कभी हो ही नहीं सकती, क्योंकि वह सदा प्राप्त ही है। जो नित्यप्राप्त है, उसकी प्राप्ति कैसे होगी? जो सदा सिद्ध है, उसकी सिद्धि किस विधि से होगी? कर्म, उपासना, योग, जप-तप, होम-हवन इत्यादि साधनों की कीमत चुकाकर मैं प्रभु को खरीद सकता हूँ, ऐसा मानना शुद्ध मूर्खता है। इन साधनों से प्रभु प्राप्त नहीं होते। प्रभु स्वयं कहते हैं – योग याग विधि येणे नोहें सिद्धी। लाग तूं सद्गुरू पायी॥ गीता के 11वें अध्याय में श्रीभगवान् स्वत: कहते हैं – नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन चेज्यया। शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा॥ (हे अर्जुन, तूने जिस रूप में मुझे देखा, मेंरे उस चतुर्भुज रूप का दर्शन वेद से, तप से, दान से अथवा यज्ञ से होना सर्वदा असंभव है।) कर्म, उपासना, योग, जप-तप, होम-हवन इत्यादि साधनों से यदि प्रभु परमात्मा प्राप्त हो जाए तो उसका मूल्य उन साधनों से निश्चित ही कम होगा। व्यवहार में भी हम देखते हैं कि बाजार जाकर किसी वस्तु का मूल्य चुकाकर जब हम किसी वस्तु को खरीदते हैं, तब उस वस्तु का वास्तविक मूल्य हमारे द्वारा चुकाये गए मूल्य से निश्चय ही कम होता है। उदाहरणार्थ आप बाजार में गए, वहाँ आपने पच्चीस हजार रुपये देकर एक मोबाइल फोन खरीदा। दुकानदार ने वह फोन आपको पच्चीस हजार में दिया, इसका यही अर्थ है कि उस फोन का वास्तविक मूल्य पच्चीस हजार से कम है, क्योंकि कोई भी दुकानदार घाटे का व्यवहार नहीं करता। उसी प्रकार यदि आप कहें कि आप एक लाख जप करके, दस हजार का दान देकर, बीस यज्ञ करके अथवा पाँच तीर्थयात्राएँ करके प्रभु को प्राप्त कर लेंगे तो आपके उस जप से, दान से, यज्ञ से तीर्थयात्रा से प्रभु का मूल्य कम हो जाएगा, ऐसा कम मूल्य का सस्ता प्रभु किस काम का? फिर हम क्या करें, किस उपाय से प्रभु को प्राप्त करें? ऐसा यदि पूछेंगे तो उसका एक ही उत्तर श्रीभगवान् देते हैं – भक्त्या त्वनन्यया शक्यमहमेवंविधोऽर्जुन। ज्ञातु द्रष्टुं च तत्त्वेन प्रवेष्टुं च परंतप॥ (परंतु हे परंतप अर्जुन, अनन्य भक्ति से ही मेंरे इस चतुर्भुज रूप को प्रत्यक्ष देखना, तत्त्वत: मेंरे स्वरूप को जानना एवं मुझ से एकरूप होना संभव है।) भक्ति की अभिव्यक्ति भाव के माध्यम से होती है, और उस भक्तिभाव को प्रगट करने के लिए श्रीजयंत्युत्सव जैसा अन्य अवसर नहीं हो सकता। अस्तु सूचित करते हुए अतीव आनन्द होता है कि, श्री प्रभु का महामांगल्यप्रद 202वाँ दत्तजयंती महोत्सव संलग्न कार्यक्रमानुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, रविवार 8-12-2019 से मार्गशीर्ष कृष्ण प्रतिपदा, शुक्रवार 13-12-2019 तक सुसंपन्न हो रहा है, अतएव आप सभी सकुटुंब, सपरिवार, स्वाश्रितजनसमेत शुभागमन कर, श्रीदर्शन, तीर्थ-प्रसाद-सेवन व भजनानंद क्रीडा से हमें आनंदित करें।

PROGRAM

Sunday 8th December 2019

06:41 AM Suprabhat Seva
07:30 AM Maharudrabhishekam & Japam
10:30 AM Rajopachar Mahapooja
03:00 PM Aaradhana
08:30 PM Maha-Prasad

Monday 9th December 2019

10:00 AM Sanagam Snaan
11:00 AM Maharudrabhishekam & Japam
02:00 AM Rajopachar Mahapooja
08:30 PM Maha-Prasad

Tuesday 10th December 2019

09:00 AM Maharudrabhishekam & Japam
03:00 PM Dakshina Darbar
08:30 PM Maha-Prasad

Wednesday 11th December 2019

09:00 AM Maharudrabhishekam & Japam
11:00 AM Guru-Poojan
06:00 PM Manik Pournima Parva
08:30 PM Maha-Prasad

Thursday 12th December 2019

09:00 AM Maharudrabhishekam & Japam
01:00 PM Darshan & Padyapooja
07:00 PM Rajopchar Mahapooja
09:00 PM Maha-Prasad

Friday 13th December 2019

11:30 PM Prabhu Darbar begins
12:00 Midnight: Prabhu Janmotsava
12:30 AM Sangeet Sabha

 

* This program is subject to change in extra ordinary and unavoidable circumstances.

Donate for Datta Jayanti Annadaan

ANNADAAN forms an integral and important part of the Annual Datta Jayanti Mahotsav, wherein thousands of visiting devotees, irrespective of caste, creed or religion, partake of the bliss of MAHA PRASAD. An estimated 1 lakh devotees will be provided MAHA PRASAD during this year’s Datta Jayanti Mahotsava beginning 8th December 2019. You can associate yourself with the ANNADAAN SEVA by sponsoring any one or more of the following PRASAD ITEMS that will be prepared in the Bhadarkhana during the Mahotsav. All donations towards Datta Jayanti Annadaan are exempt from income tax under Section 80-G of the Indian Income Tax Act, 1961. You can click on one or more items to make a donation.